बुधवार, 25 सितंबर 2013
शनिवार, 21 सितंबर 2013
मंगलवार, 2 अप्रैल 2013
YATRA: हम भी खाते हैं,तुम भी खाओइस महाभोज में भूखे क्यो...
YATRA:
हम भी खाते हैं,तुम भी खाओ
इस महाभोज में भूखे क्यो...: हम भी खाते हैं,तुम भी खाओ इस महाभोज में भूखे क्यों हो तुम भी कमाओ,हम भी कमायें मुनाफे की बात बस आम न हो जाल बिछाओ,मछली फसाओ जा...
हम भी खाते हैं,तुम भी खाओ
इस महाभोज में भूखे क्यो...: हम भी खाते हैं,तुम भी खाओ इस महाभोज में भूखे क्यों हो तुम भी कमाओ,हम भी कमायें मुनाफे की बात बस आम न हो जाल बिछाओ,मछली फसाओ जा...
गुरुवार, 16 अगस्त 2012
मेरा देश प्यारा
चंदन सी खुशबू माटी का गंध हो
फूलों से महकता हवा में गंध हो
देश मेरा प्यारा विश्व का सिरमौर हो
नभ में चमकता सूरज सा प्रचंड हो .
नदियाँ जहां जीवन का राग गाती हों
चिड़िया चह-चहाती प्यार का मन्त्र हो
युवाओं में तैरता सागर सा तरंग हो
जन-जन में भरा स्वर्ग सा उमंग हो .
तीन छोरों से घिर रक्षा जलधि करे
सीमा में खड़ा प्रहरी हिम उत्तुंग हो
सभ्यता की तितलियों सा रंग हो
वीरों की धरा यह फहरता तिरंग हो
मंदिर,मस्जिद,चर्च,गुरुद्वारे यहाँ
ईद में मिलन व होली का रंग हो
गुरुग्रंथ,गीता,बाइबिल,कुरआन में
सत्य,प्रेम,अहिंसा का अनुगूँज हो .
अहोक,अकबर सा गांधी महान हों
शहीदों के रक्त से जिसका श्रृंगार हो
नानक,कबीर,रैदास जैसे संत हों
चैतन्य महाप्रभु और विवेकानंद हों .
गंगा,यमुना,सतलुज,सिन्धु,ताप्ती
गोदावरी,कावेरी की कथा अनंत हो
फसलें लह-लहाती धरती हरी-भरी हो
पल्लवित संस्कृति युगों से सिंचित हो .
रोग, भय, भूख, कुपोषण, गरीबी
महगाई की मार का न आतंक हो
शिक्षित हों बच्चे,मुख में मुस्कान हो
रामराज्य का साकार संकल्प हो
फूलों से महकता हवा में गंध हो
देश मेरा प्यारा विश्व का सिरमौर हो
नभ में चमकता सूरज सा प्रचंड हो .
नदियाँ जहां जीवन का राग गाती हों
चिड़िया चह-चहाती प्यार का मन्त्र हो
युवाओं में तैरता सागर सा तरंग हो
जन-जन में भरा स्वर्ग सा उमंग हो .
तीन छोरों से घिर रक्षा जलधि करे
सीमा में खड़ा प्रहरी हिम उत्तुंग हो
सभ्यता की तितलियों सा रंग हो
वीरों की धरा यह फहरता तिरंग हो
मंदिर,मस्जिद,चर्च,गुरुद्वारे यहाँ
ईद में मिलन व होली का रंग हो
गुरुग्रंथ,गीता,बाइबिल,कुरआन में
सत्य,प्रेम,अहिंसा का अनुगूँज हो .
अहोक,अकबर सा गांधी महान हों
शहीदों के रक्त से जिसका श्रृंगार हो
नानक,कबीर,रैदास जैसे संत हों
चैतन्य महाप्रभु और विवेकानंद हों .
गंगा,यमुना,सतलुज,सिन्धु,ताप्ती
गोदावरी,कावेरी की कथा अनंत हो
फसलें लह-लहाती धरती हरी-भरी हो
पल्लवित संस्कृति युगों से सिंचित हो .
रोग, भय, भूख, कुपोषण, गरीबी
महगाई की मार का न आतंक हो
शिक्षित हों बच्चे,मुख में मुस्कान हो
रामराज्य का साकार संकल्प हो
मंगलवार, 14 अगस्त 2012
लहरें
लहरों की अजब चालें है उलटी
पास आती चीजों को दूर फेकती
भूमि को थप-थापाती हैं प्यार से
धीरे-धीरे आगोश में है भर लेतीं
ले लेतीं हैं रंग धरती का उससे
फिरकी ले-लेकर हैं नृत्य करती
कतरा-कतरा गिर-गिरकर बूँदें
लहर बनकर फिर कहर हैं करतीं
रोम-रोम भिगो,स्वर्गीय सुख देतीं
ग्रीष्म तपी भूमि को हैं तृप्त करतीं
दे धरती को हरियाली,वापस जातीं
तटबंधों में जा आराम है फरमाती
पास आती चीजों को दूर फेकती
भूमि को थप-थापाती हैं प्यार से
धीरे-धीरे आगोश में है भर लेतीं
ले लेतीं हैं रंग धरती का उससे
फिरकी ले-लेकर हैं नृत्य करती
कतरा-कतरा गिर-गिरकर बूँदें
लहर बनकर फिर कहर हैं करतीं
रोम-रोम भिगो,स्वर्गीय सुख देतीं
ग्रीष्म तपी भूमि को हैं तृप्त करतीं
दे धरती को हरियाली,वापस जातीं
तटबंधों में जा आराम है फरमाती
आइना हर युग का सच तेरे पास रखा है
साहित्य,कला, संस्कृति में सजा रखा है
आइना बयान करता है सच रौशनी का
अन्धेले का सच नहीं कहता,चुप रहता है
मेरी आँखे मुझे नहीं देख पाती,फिरभी
आइना मेरा सच-सच बयान करता है
छोटी-बड़ी,आड़ी-तिरछी,ऊँच-नीच हर
परिस्थितियों का ज्ञान आइना रखता है
अवतल,उत्तल,कई प्रकार आइना का
आकार के पहले उसका प्रकार देखना है
गत-आगत का एहसास कराता आइना
कभी झूठ-सच,कभी भ्रम पैदा करता है
उलझ जाता है मन देख श्वेत केशों को
ऐ आइना!तू रंगों का सच, पाता कहाँ है
आइना तू सच बोलता है तो बता सच
आज तो मैंने बालों में रंग करा रखा है
हर एक चेहरा आइना है,प्रतिबिम्ब भी
आइना,आईने में अपनी अक्स ढूढ़ता है
साहित्य,कला, संस्कृति में सजा रखा है
आइना बयान करता है सच रौशनी का
अन्धेले का सच नहीं कहता,चुप रहता है
मेरी आँखे मुझे नहीं देख पाती,फिरभी
आइना मेरा सच-सच बयान करता है
छोटी-बड़ी,आड़ी-तिरछी,ऊँच-नीच हर
परिस्थितियों का ज्ञान आइना रखता है
अवतल,उत्तल,कई प्रकार आइना का
आकार के पहले उसका प्रकार देखना है
गत-आगत का एहसास कराता आइना
कभी झूठ-सच,कभी भ्रम पैदा करता है
उलझ जाता है मन देख श्वेत केशों को
ऐ आइना!तू रंगों का सच, पाता कहाँ है
आइना तू सच बोलता है तो बता सच
आज तो मैंने बालों में रंग करा रखा है
हर एक चेहरा आइना है,प्रतिबिम्ब भी
आइना,आईने में अपनी अक्स ढूढ़ता है
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