बुधवार, 24 फ़रवरी 2021
रविवार, 6 मई 2018
रविवार, 3 जुलाई 2016
शुक्रवार, 30 मई 2014
भगवान् रूपनाथ का मंदिर
रूप नाथ भगवान का मन्दिर बहोरीबन्द से 5 किमी.दूर जबलपुर माग॔ पर स्थित है।पुरातत्व विभाग इसकी देख-रेख करता हे।यहाॅ पर भगभगवा शिव की प्राचीन प्रतिमा है।पहाड़ी पर स्थित शिवलिग देखकर प्रतीत होता है कि पहले यहाॅ मन्दिर नही था, बाद मे बनाया गया है।नीचे दो बड़े कुण्ड और एक छोटा कुण्ड है।पहाड़ी में ऊपर दो और छोटे -छोटे कुण्ड है।पहाड़ी से ही रिस कर पानी कुण्डों में आता है।पानी का रिसाव भीषण गर्मी में भी बन्द नही होता।इसलिए कुंड कभी सूखते नही है।शिव मंदिर के सामने मां पार्वती का मंदिर है।पहाड़ी के ठीक नीचे स्थित कुंड के बायीं ओर सम्राट अशोक के समय का शिलालेख ब्राह्मी लिपि में है जिसमें बौद्ध-धर्म प्रचार संबंधी लेख है।यह स्थान अत्यंत सुरम्य एव मनोहारी है।यहां आने पर मन को अद्भुत शांति मिलती है।यहाँ यह किवदंती भी सुनने को मिली कि भगवान शिव यहीं से उठकर बांदकपुर गये हैं।
शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014
गुरुवार, 3 अप्रैल 2014
सोमवार, 10 मार्च 2014
रविवार, 2 मार्च 2014
सोमवार, 20 जनवरी 2014
बुधवार, 8 जनवरी 2014
रविवार, 29 दिसंबर 2013
रविवार, 6 अक्टूबर 2013
बुधवार, 25 सितंबर 2013
शनिवार, 21 सितंबर 2013
मंगलवार, 2 अप्रैल 2013
YATRA: हम भी खाते हैं,तुम भी खाओइस महाभोज में भूखे क्यो...
हम भी खाते हैं,तुम भी खाओ
इस महाभोज में भूखे क्यो...: हम भी खाते हैं,तुम भी खाओ इस महाभोज में भूखे क्यों हो तुम भी कमाओ,हम भी कमायें मुनाफे की बात बस आम न हो जाल बिछाओ,मछली फसाओ जा...
गुरुवार, 16 अगस्त 2012
मेरा देश प्यारा
फूलों से महकता हवा में गंध हो
देश मेरा प्यारा विश्व का सिरमौर हो
नभ में चमकता सूरज सा प्रचंड हो .
नदियाँ जहां जीवन का राग गाती हों
चिड़िया चह-चहाती प्यार का मन्त्र हो
युवाओं में तैरता सागर सा तरंग हो
जन-जन में भरा स्वर्ग सा उमंग हो .
तीन छोरों से घिर रक्षा जलधि करे
सीमा में खड़ा प्रहरी हिम उत्तुंग हो
सभ्यता की तितलियों सा रंग हो
वीरों की धरा यह फहरता तिरंग हो
मंदिर,मस्जिद,चर्च,गुरुद्वारे यहाँ
ईद में मिलन व होली का रंग हो
गुरुग्रंथ,गीता,बाइबिल,कुरआन में
सत्य,प्रेम,अहिंसा का अनुगूँज हो .
अहोक,अकबर सा गांधी महान हों
शहीदों के रक्त से जिसका श्रृंगार हो
नानक,कबीर,रैदास जैसे संत हों
चैतन्य महाप्रभु और विवेकानंद हों .
गंगा,यमुना,सतलुज,सिन्धु,ताप्ती
गोदावरी,कावेरी की कथा अनंत हो
फसलें लह-लहाती धरती हरी-भरी हो
पल्लवित संस्कृति युगों से सिंचित हो .
रोग, भय, भूख, कुपोषण, गरीबी
महगाई की मार का न आतंक हो
शिक्षित हों बच्चे,मुख में मुस्कान हो
रामराज्य का साकार संकल्प हो


